भारतीय आईटी सेक्टर को लंबे समय तक “सेफ बेट” माना जाता था। लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ विस्तार ने पूरे सेक्टर की दिशा बदलनी शुरू कर दी है। इंडस्ट्री अनुमानों के अनुसार, 2025 तक ग्लोबल आईटी मार्केट लगभग 850 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि ग्लोबल AI मार्केट करीब 35 लाख करोड़ रुपये के आसपास आंका जा रहा है।
हालांकि भारत अभी भी ग्लोबल आईटी सप्लाई चेन का बैकबोन माना जाता है, लेकिन AI मार्केट का हिस्सा अभी लगभग 6% यानी करीब 2 लाख करोड़ रुपये है—जो बताता है कि असली ग्रोथ अभी बाकी है।
मार्केट क्या संकेत दे रहा है?
पिछले एक साल में आईटी सेक्टर के प्रदर्शन में दबाव देखने को मिला है।
- Nifty IT लगभग 20% गिरा
- जबकि Nifty 50 लगभग 12% बढ़ा
यह अंतर बताता है कि निवेशक पारंपरिक आईटी मॉडल से AI-ड्रिवन बिज़नेस मॉडल की ओर बदलाव देख रहे हैं।
दूसरी ओर, अनुमान है कि भारत का AI मार्केट अगले कुछ वर्षों में लगभग 38% CAGR से बढ़कर 29–30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
आईटी सेक्टर में नया ट्रेंड: बिलिंग आवर्स से आउटकम मॉडल तक
पहले भारतीय आईटी कंपनियों का मॉडल “बिलिंग आवर्स” पर आधारित था—यानी क्लाइंट को प्रति घंटे चार्ज करना। अब AI के साथ कंपनियां “आउटकम बेस्ड मॉडल” की ओर शिफ्ट कर रही हैं।
इस बदलाव के साथ:
- बड़े स्तर पर रिस्किलिंग शुरू हुई है
- AI में बिलियन-डॉलर निवेश बढ़ा है
- ऑटोमेशन से प्रोडक्टिविटी तेज़ हुई है
अब सवाल यह है कि AI के इस नए दौर में कौन-सी कंपनियां वास्तव में पैसा कमाएंगी?
कंपनी 1: Mobavenue AI Tech Limited – AI आधारित डिजिटल ग्रोथ मॉडल
Mobavenue एक डिजिटल-फर्स्ट AdTech कंपनी है जो AI-पावर्ड एडवरटाइजिंग प्लेटफॉर्म्स पर काम करती है।
बिजनेस मॉडल कैसे काम करता है?
कंपनी केवल विज्ञापन दिखाने के पैसे नहीं लेती, बल्कि:
- लीड्स
- ऐप इंस्टॉल
- खरीदारी (Purchases)
जैसे मापने योग्य परिणामों पर चार्ज करती है।
भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार लगभग 59,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और कंपनी इस तेजी से बढ़ते इकोसिस्टम का हिस्सा है।
AI का रोल
- रोज़ 100 करोड़ से अधिक डेटा सिग्नल प्रोसेस
- प्रोग्रामेटिक AI टार्गेटिंग
- पूरा कस्टमर फनल ऑटोमेशन
कंपनी के Q3 डेटा के अनुसार:
- 92% रेवेन्यू आउटकम-लिंक्ड
- 67% YoY सेल्स ग्रोथ
- ऑपरेटिंग मार्जिन ~22%
प्रमुख जोखिम
- स्टॉक वैल्यूएशन बहुत हाई (लगभग 96x PE)
- कैश कन्वर्ज़न साइकिल लंबा (लगभग 367 दिन)
यह दर्शाता है कि ग्रोथ मजबूत है, लेकिन कैश फ्लो निगरानी जरूरी है।
कंपनी 2: Coforge – AI ट्रांसफॉर्मेशन पार्टनर
Coforge पारंपरिक आईटी सर्विस कंपनी से AI-फर्स्ट डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कंपनी बनने की ओर बढ़ रही है।
यह मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर फोकस करती है:
- AI Engineering
- Data & Analytics
- Cloud Infrastructure
इंडस्ट्री फोकस
- Banking
- Insurance
- Travel & Transportation
उदाहरण:
- Loan processing automation
- AI-based fraud detection
- Ticketing automation
ग्रोथ प्लान
FY27 तक:
- 18,000 करोड़ वार्षिक रेवेन्यू टारगेट
- AI-led इंजीनियरिंग से बड़ा योगदान
हालिया प्रदर्शन
- 3 साल का सेल्स CAGR: 23%
- प्रॉफिट CAGR: 7%
हालांकि पिछले 12 महीनों में:
- ऑपरेटिंग मार्जिन सुधरे
- AI टूल्स से लागत कम हुई
AI अब केवल नैरेटिव नहीं, प्रॉफिट ड्राइवर बन रहा है
Coforge के AI टूल्स के प्रभाव:
- बैंकिंग कंप्लायंस वर्कलोड 80% तक कम
- इंश्योरेंस प्रोसेसिंग टाइम 66% कम
- ट्रैवल प्रोसेस ऑटोमेशन में तेज़ी
इसके अलावा:
- ऑर्डर बुक मजबूत
- रिपीट बिजनेस 94%
- क्लाइंट बेस बढ़कर 245
वैल्यूएशन रिस्क: ग्रोथ स्टोरी बनाम रियलिटी
AI स्पेस में हाई वैल्यूएशन सामान्य हो गया है। उदाहरण के तौर पर E2E Networks जैसे स्टॉक्स में पहले तेज़ मल्टीपल एक्सपेंशन देखा गया, लेकिन कमजोर तिमाही नतीजों के बाद डी-रेटिंग भी हुई।
सीख साफ है:
- केवल रेवेन्यू ग्रोथ पर्याप्त नहीं
- कैश फ्लो और मार्जिन स्थिरता ज्यादा महत्वपूर्ण
निष्कर्ष: AI युग में कौन जीतेगा?
AI भारतीय आईटी सेक्टर को पूरी तरह बदल रहा है।
- AdTech और डेटा प्लेटफॉर्म कंपनियां आउटकम मॉडल से तेजी से बढ़ सकती हैं
- पारंपरिक आईटी कंपनियां AI ट्रांसफॉर्मेशन से मार्जिन सुधार सकती हैं
लेकिन अंतिम विजेता वही होंगे जो:
- AI को वास्तविक रेवेन्यू में बदलें
- कैश फ्लो मजबूत रखें
- स्केलेबल टेक प्लेटफॉर्म बनाएं
AI का यह दौर सिर्फ टेक्नोलॉजी बदलाव नहीं, बल्कि बिजनेस मॉडल का परिवर्तन है—और यही आने वाले वर्षों में भारतीय आईटी सेक्टर की दिशा तय करेगा।