ईरान-इजरायल संघर्ष से भारत में खाद संकट: यूरिया-डीएपी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? | Iran-Israel Conflict Impact on India Fertilizer Crisis

ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने भारत के लिए एक नया संकट खड़ा कर दिया है – खाद (फर्टिलाइजर) का संकट। पिछले कुछ दिनों में यूरिया, डीएपी और अन्य फॉस्फेट खादों के दाम 20-30% तक बढ़ चुके हैं। RBI का यूरिया अफोर्डेबिलिटी इंडेक्स 2010 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद उपभोक्ता है। हमारी ज्यादातर जरूरतें पर्शियन गल्फ से पूरी होती हैं – जहां स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की स्थिति बन गई है। यह सिर्फ ऑयल का नहीं – बल्कि खाद का भी संकट बन चुका है। आज हम समझेंगे कि यह संकट कैसे पैदा हुआ, भारत पर इसका असर क्या है और किसानों की मुश्किलें क्यों बढ़ रही हैं।

खाद क्या है और भारत की निर्भरता कहां से पूरी होती है?

खाद के तीन मुख्य पोषक तत्व होते हैं: नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और पोटाशियम (K)।

  • यूरिया – नाइट्रोजन का मुख्य स्रोत। भारत 87% यूरिया खुद बनाता है, लेकिन इसका कच्चा माल (नेचुरल गैस) ज्यादातर आयात होता है।
  • डीएपी – फॉस्फेट आधारित। भारत इसका 60% सऊदी अरब और मिडिल ईस्ट से आयात करता है।
  • पोटाश – पूरी तरह आयात पर निर्भर।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 20% ग्लोबल LNG, 44% सल्फर और 50% यूरिया एक्सपोर्ट्स गुजरते हैं। जहाज रुकने से सप्लाई चेन टूट रहा है।

संघर्ष का खाद पर सीधा असर: तीन बड़े लेयर

  1. रॉ मटेरियल और गैस का संकट यूरिया अमोनिया से बनता है और अमोनिया नेचुरल गैस से। गैस का 70-80% कॉस्ट यहीं जाता है। स्ट्रेट बंद होने से गैस आयात रुका तो प्लांट्स की लागत बढ़ी। डीएपी में भी अमोनिया और सल्फ्यूरिक एसिड (ऑयल-गैस से मिलता है) जरूरी है।
  2. शिपिंग और इंश्योरेंस का संकट मरीन इंश्योरेंस कंपनियों ने वॉर रिस्क कवरेज हटा दिया या प्रीमियम 10 गुना बढ़ा दिया। जहाज रुक गए। फर्टिलाइजर इंस्टीट्यूट के अनुसार, कार्गो कैंसिलेशन से तुरंत सप्लाई कम हो गई।
  3. ग्लोबल प्राइस स्पाइक गल्फ देश 50% यूरिया एक्सपोर्ट करते हैं। सप्लाई में 30% तक कमी आ सकती है। इंटरनेशनल प्राइस बढ़ने से भारत पर दबाव – चाहे डायरेक्ट इंपोर्ट हो या डोमेस्टिक प्रोडक्शन।

भारत में डोमेस्टिक प्रोडक्शन पर असर

गेल (GAIL), IOC और BPCL ने इंडस्ट्रियल कस्टमर्स को गैस सप्लाई 60-65% तक कम कर दी।

  • GNFC ने घोषणा की – 6 मार्च से गैस एलोकेशन 60% कम। प्रोडक्शन प्रभावित।
  • गवर्नमेंट ने नेशनल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर 2026 लागू किया:
    • हाउसहोल्ड्स (PNG/CNG/LPG) को 100% एलोकेशन
    • फर्टिलाइजर को पिछले 6 महीने के एवरेज का 70%
    • रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्स को 65%

फर्टिलाइजर प्लांट्स में मेंटेनेंस शटडाउन मार्च में शिफ्ट कर दिया गया ताकि जून (खरीफ सीजन) में गैस उपलब्ध रहे।

किसानों पर असर और आगे क्या?

  • स्टॉक बफर मौजूद है – यूरिया 1.8 महीने, डीएपी 3.4 महीने का कवर।
  • खरीफ सीजन (जून से) तक मैनेज हो सकता है – लेकिन प्राइस बढ़ेंगे।
  • सब्सिडी बिल पर दबाव – 2026-27 के लिए 1.71 लाख करोड़ पहले से टाइट था।

अगर संकट मई-जून तक चला तो सीरियस शॉर्टेज हो सकता है।

निष्कर्ष

ईरान-इजरायल संघर्ष ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जोखिम में डाल दिया है। भारत के लिए यह सिर्फ ऑयल संकट नहीं – बल्कि खाद संकट भी बन गया है। यूरिया-डीएपी के दाम 20-30% बढ़ चुके हैं। गैस सप्लाई कम होने से डोमेस्टिक प्रोडक्शन प्रभावित है।

फिलहाल स्टॉक से खरीफ सीजन मैनेज हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक संकट चला तो किसानों को महंगी खाद और कम उपलब्धता का सामना करना पड़ेगा। भारत को गैस और खाद में आत्मनिर्भरता बढ़ानी होगी – तभी ऐसे संकटों से बचा जा सकेगा।

की इनसाइट्स

  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद उपभोक्ता – यूरिया 87% डोमेस्टिक, लेकिन गैस आयात पर निर्भर
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 20% LNG, 50% यूरिया एक्सपोर्ट्स गुजरते हैं
  • गेल को गैस एलोकेशन 60% तक कम – फर्टिलाइजर प्लांट्स प्रभावित
  • यूरिया अफोर्डेबिलिटी इंडेक्स 2010 के बाद सबसे निचले स्तर पर
  • 2026-27 सब्सिडी बिल पर भारी दबाव – 1.71 लाख करोड़ पहले से टाइट

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. ईरान-इजरायल संघर्ष से खाद पर असर क्यों पड़ रहा है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से गैस, सल्फर और यूरिया आयात रुका – सप्लाई चेन टूटा।
  2. भारत कितना खाद आयात करता है? यूरिया 13%, डीएपी 60%, पोटाश 100% आयात पर निर्भर।
  3. गवर्नमेंट ने गैस सप्लाई पर क्या किया? हाउसहोल्ड्स को 100%, फर्टिलाइजर को 70%, रिफाइनरी को 65% एलोकेशन।
  4. किसानों पर असर क्या होगा? महंगी खाद, संभावित शॉर्टेज – खरीफ सीजन में दबाव बढ़ेगा।
  5. क्या भारत इस संकट से बच सकता है? फिलहाल स्टॉक से मैनेज हो सकता है – लेकिन लंबे संकट में आत्मनिर्भरता जरूरी।

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