जर्मनी की पुरानी पवनचक्कियों को नया जीवन: सेकंड हैंड विंड टरबाइन का बढ़ता बाजार

Second Hand Wind Turbines: Refurbishment and Second Life Explained

र्मनी के सुदूर उत्तर में, जहां तेज हवाएं चलती हैं और दूर-दूर तक विशाल पवनचक्कियां नजर आती हैं, वहां एक दिलचस्प बदलाव हो रहा है। कई टरबाइनें सिर्फ 13 साल पुरानी हैं, लेकिन उन्हें हटाना पड़ रहा है ताकि जगह पर बड़ा ट्रांसफॉर्मर स्टेशन बन सके। ये तीन मेगावॉट वाली टरबाइनें यूरोप की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी की हैं, फिर भी स्क्रैप नहीं हो रही हैं। इन्हें सावधानी से अलग किया जा रहा है, चेक किया जा रहा है और फिर से बेचा जा रहा है।

यह प्रक्रिया दिखाती है कि विंड एनर्जी में अब ‘सेकंड लाइफ’ का कॉन्सेप्ट तेजी से बढ़ रहा है। पुरानी टरबाइनें कबाड़ में नहीं जातीं, बल्कि रिफर्बिश होकर नए जगहों पर लगाई जाती हैं। इससे न सिर्फ पैसे बचते हैं बल्कि पर्यावरण को भी फायदा होता है।

पुरानी टरबाइन को अलग करने की चुनौती क्या है?

टरबाइन को पुर्जा-पुर्जा अलग करना आसान नहीं। सबसे बड़ी मुश्किल मौसम है। टीम हवा के पूर्वानुमान देखती है और ‘विंड गैप’ का इंतजार करती है – जब हवा 35 किलोमीटर प्रति घंटा से कम हो। इससे ज्यादा हवा में काम असंभव हो जाता है और पूरा ऑपरेशन रुक सकता है।

तैयारी में हर बोल्ट, नट और तार को चेक करना पड़ता है। कभी-कभी बोल्ट इतने जकड़े होते हैं कि उन्हें काटना पड़ता है। काम सबसे ऊपर से शुरू होता है – 94 मीटर ऊंचाई पर नैसेल में, जहां गियरबॉक्स और जनरेटर जैसे मुख्य हिस्से होते हैं।

  • ब्लेड सबसे पहले उतारे जाते हैं – हर ब्लेड 12 टन का, 55 मीटर लंबा।
  • फिर हब (34 टन) और सबसे भारी ड्राइव ट्रेन (53 टन)।

हर हिस्से को बैलेंस रखते हुए क्रेन से नीचे लाया जाता है। एक छोटी सी गलती भी प्रोजेक्ट को महंगा पड़ सकती है।

रिफर्बिशमेंट प्रक्रिया कैसे होती है?

टरबाइन को नीदरलैंड्स की एक नई वर्कशॉप में ले जाया जाता है। यहां हर पार्ट को पूरी तरह अलग किया जाता है, साफ किया जाता है और बारीकी से जांचा जाता है।

टेक्नीशियन एक-दो महीने में ओवरहॉलिंग करते हैं। पुरानी टरबाइन को अपग्रेड भी किया जाता है – बड़ा रोटर लगाकर पावर बढ़ाई जाती है, नया कंट्रोल सिस्टम जोड़कर कुशलता बढ़ाई जाती है। इससे ज्यादा हवा पकड़कर ज्यादा बिजली बनती है।

पुराने अच्छे पार्ट्स स्पेयर के तौर पर स्टोर हो जाते हैं, जो भविष्य में काम आएंगे।

सेकंड हैंड टरबाइन का बाजार क्यों बढ़ रहा है?

यूरोप में 2022 तक 20% पवनचक्कियां अपनी औसत उम्र पार कर चुकी हैं। नई टरबाइन महंगी पड़ रही हैं – लागत 35% तक बढ़ गई है। ऐसे में पुरानी टरबाइनें खरीदना फायदेमंद है।

कंपनियां जैसे बिजनेस इन विंड पुरानी टरबाइनें खरीदती हैं, रिफर्बिश करती हैं और 10-15 साल और चलाने लायक बनाती हैं। एक टरबाइन नए मालिक को 10-15 लाख डॉलर कमा सकती है। छोटी कंपनियां इसे आकर्षक मानती हैं क्योंकि नई टरबाइन से सस्ती पड़ती है।

रिफर्बिश्ड टरबाइन से 60% तक उत्सर्जन बचता है, हालांकि ट्रांसपोर्टेशन का खर्च लगता है।

फायदे और जोखिम क्या हैं?

फायदे:

  • सस्ती – नई से काफी कम कीमत
  • रिटर्न बेहतर – कुछ रिपोर्ट्स में 19% तक, नई से ज्यादा
  • पर्यावरण अनुकूल – रिसाइकिल और रीयूज से संसाधन बचते हैं

जोखिम:

  • पहले से ज्यादा खराबी का डर
  • ज्यादा मेंटेनेंस और सर्विसिंग
  • हर टरबाइन की स्थिति अलग – घिसाव, पिछले लोकेशन पर निर्भर

फिर भी, मांग बढ़ रही है – अमेरिका, कनाडा, यूरोप और एशिया में। 2030 के दशक में हजारों गियरबॉक्स और पार्ट्स रिफर्बिश होंगे।

मुख्य अंतर्दृष्टि

  • विंड गैप का इंतजार और सावधानीपूर्वक तैयारी डिसमेंटलिंग की कुंजी है।
  • रिफर्बिशमेंट से टरबाइन को 10-15 साल अतिरिक्त जीवन मिलता है और पावर बढ़ती है।
  • सेकंड हैंड बाजार नई टरबाइन से सस्ता और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प है।
  • स्पेयर पार्ट्स की मांग से पूरा इंडस्ट्री बूस्ट हो रहा है।

निष्कर्ष

पुरानी पवनचक्कियों को अलग करना, जांचना और रिफर्बिश कर नए जीवन देना अब एक बड़ा और फायदेमंद बाजार बन गया है। जर्मनी जैसे देशों में जहां पुरानी टरबाइनें हट रही हैं, कंपनियां इन्हें स्क्रैप करने के बजाय बेच रही हैं और अपग्रेड कर रही हैं। इससे न सिर्फ पैसे बच रहे हैं बल्कि हरित ऊर्जा का चक्र चलता रह रहा है। भविष्य में यह ट्रेंड और तेज होगा, क्योंकि नई टरबाइन महंगी हैं और संसाधन बचाना जरूरी है। सेकंड हैंड विंड टरबाइन न सिर्फ आर्थिक स्मार्ट चॉइस है, बल्कि सस्टेनेबल भी।

पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. पुरानी टरबाइन को अलग करने में सबसे बड़ी समस्या क्या है? मौसम – तेज हवा में काम असंभव होता है, इसलिए विंड गैप का इंतजार करना पड़ता है।

2. रिफर्बिश्ड टरबाइन कितने साल चल सकती है? अच्छी कंडीशन में 10-15 साल अतिरिक्त, अपग्रेड के साथ ज्यादा पावर भी देती है।

3. सेकंड हैंड टरबाइन खरीदने के फायदे क्या हैं? नई से सस्ती, बेहतर रिटर्न (19% तक), और 60% तक कम उत्सर्जन।

4. क्या पुरानी टरबाइन में ज्यादा खराबी का खतरा रहता है? हां, लेकिन जांच और ओवरहॉलिंग से जोखिम कम किया जाता है, हालांकि मेंटेनेंस ज्यादा लग सकता है।

5. यह बाजार कहां बढ़ रहा है? यूरोप, अमेरिका, कनाडा और एशिया में – 2030 तक हजारों पार्ट्स रिफर्बिश होंगे।

Leave a Comment