Why India’s Property Tax Collection is Shockingly Low Despite Real Estate Boom
भारत का प्रॉपर्टी मार्केट पिछले 20 सालों से लगातार बूम पर है। मेट्रो और टियर-1 शहरों में हर तरफ नए निर्माण हो रहे हैं और प्रॉपर्टी वैल्यू कई गुना बढ़ चुकी है। फिर भी प्रॉपर्टी टैक्स – जो सीधा स्थानीय सरकार का राजस्व है – GDP का सिर्फ 0.15% ही रह गया है। यह लो इनकम देशों के आधे और मिडिल इनकम देशों के एक-चौथाई से भी कम है।
24 सबसे बड़े शहरों में से 10 शहरों में पिछले 10 सालों में प्रति व्यक्ति प्रॉपर्टी टैक्स वास्तव में घट गया है। सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस (CS&EP) के एक नए वर्किंग पेपर में इस समस्या को विस्तार से समझाया गया है। आज हम इसी पेपर के आधार पर भारत के प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन सिस्टम की सच्चाई, चुनौतियों और सुधार की जरूरत को समझेंगे।
प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन का पूरा प्रोसेस
भारत में प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्ट करने की जिम्मेदारी थ्योरी में म्यूनिसिपल कॉरपोरेशंस (ULBs) के पास है। 1992 में इनका गठन स्थानीय स्तर पर स्वशासन के लिए किया गया था। लेकिन हकीकत कुछ और है। स्टेट सरकारों के पास स्टाफिंग, वैल्यूएशन और यहां तक कि लोकल बॉडी को भंग करने का अधिकार है।
प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन को तीन मुख्य स्टेजेस में बांटा जा सकता है:
- प्रॉपर्टीज की पहचान और रिकॉर्ड: शहरों में कितनी प्रॉपर्टीज हैं, इसका सही डेटा रखना।
- वैल्यूएशन और टैक्स कैलकुलेशन: प्रॉपर्टी की वैल्यू तय करके टैक्स तय करना।
- बिलिंग और कलेक्शन: बिल भेजना और पैसे वसूल करना।
हर स्टेज पर ULBs को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
भारत के प्रॉपर्टी टैक्स सिस्टम की बड़ी चुनौतियां
सबसे पहले कवरेज की समस्या है। बेंगलुरु (BBMP) में सिर्फ 49% प्रॉपर्टीज ही रिकॉर्डेड हैं, जबकि पुणे में 78-83% कवरेज है। फंडिंग और स्टाफ की कमी के कारण GIS मैपिंग भी पुरानी पड़ जाती है।
दूसरी बड़ी समस्या वैल्यूएशन मेथड की है। ज्यादातर शहर एरिया-बेस्ड वैल्यूएशन सिस्टम इस्तेमाल करते हैं। इसमें बेस रेट तय होता है, जो मार्केट वैल्यू के साथ अपने आप नहीं बढ़ता। नतीजा – प्रॉपर्टी महंगी होने पर भी टैक्स नहीं बढ़ता।
कैपिटल वैल्यू मेथड बेहतर विकल्प है, जो स्टैंप ड्यूटी गाइडेंस वैल्यू से लिंक होता है। लेकिन बेंगलुरु में इसे लागू करने की कोशिश पर नागरिकों के विरोध और राज्य सरकार की अनिच्छा के कारण फेल हो गया।
तीसरी समस्या कलेक्शन एफिशिएंसी की है। पुणे में आउटस्टैंडिंग ड्यूज 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हैं। गाजियाबाद में कलेक्शन एफिशिएंसी 60% से गिरकर 50% रह गई है। कई ULBs अभी भी कैश-बेस्ड अकाउंटिंग फॉलो करते हैं, जिससे अरियर्स का सही ट्रैक रखना मुश्किल हो जाता है।
Key Insights
- 24 बड़े शहरों में 10 में प्रति व्यक्ति प्रॉपर्टी टैक्स पिछले 10 साल में घटा
- बेंगलुरु में सिर्फ 49% प्रॉपर्टीज रिकॉर्डेड हैं
- पुणे में नियमित बेस रेट रिवीजन से टैक्स कलेक्शन 290% बढ़ा
- ज्यादातर शहर कैश-बेस्ड अकाउंटिंग से सही आंकड़े नहीं दिखा पाते
- लोकल बॉडीज को स्टेट सरकारों पर निर्भर रहना पड़ता है
निष्कर्ष
भारत का प्रॉपर्टी टैक्स सिस्टम रियल एस्टेट बूम के बावजूद कमजोर रहा है क्योंकि संस्थागत समस्याएं बहुत गहरी हैं। म्यूनिसिपल चुनावों की अनियमितता, स्टेट सरकारों का ज्यादा नियंत्रण और पुरानी वैल्यूएशन प्रणाली ने ULBs को कमजोर कर दिया है। अगर लोकल बॉडीज को असली स्वायत्तता मिले, वैल्यूएशन को मार्केट से जोड़ा जाए और कवरेज बढ़ाया जाए, तो प्रॉपर्टी टैक्स शहरों के विकास का मजबूत आधार बन सकता है।
FAQs
- भारत में प्रॉपर्टी टैक्स GDP का कितना प्रतिशत है?
सिर्फ 0.15%, जो अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है। - बेंगलुरु में प्रॉपर्टी कवरेज रेशियो कितना है?
सिर्फ 49% प्रॉपर्टीज ही रिकॉर्डेड हैं। - कैपिटल वैल्यू मेथड क्या है?
यह प्रॉपर्टी टैक्स को स्टैंप ड्यूटी वैल्यू से लिंक करता है, जो मार्केट वैल्यू के साथ ऑटोमैटिक बढ़ता है। - प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन क्यों कम हो रहा है?
पुरानी वैल्यूएशन, स्टाफ की कमी, चुनाव न होना और कैश-बेस्ड अकाउंटिंग के कारण। - सुधार के लिए क्या जरूरी है?
नियमित चुनाव, बेहतर वैल्यूएशन सिस्टम और ULBs को ज्यादा स्वायत्तता।