India’s PSU Ratna System: महारत्न, नवरत्न और मिनीरत्न PSUs की पूरी जानकारी


Maharatna, Navratna & Miniratna: Complete Guide to India’s PSU Ratna System

भारत के लिस्टेड पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) स्टॉक मार्केट की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में 8-9% हिस्सा रखते हैं। ONGC, NTPC, Coal India, IOC जैसी कंपनियां हर निवेशक के पोर्टफोलियो में कहीं न कहीं मौजूद रहती हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन PSUs को Maharatna, Navratna और Miniratna जैसी कैटेगरी में क्यों बांटा जाता है।

आज हम इसी PSU Ratna System को आसान भाषा में समझेंगे – यह सिस्टम कैसे काम करता है, कंपनियों को क्या फायदे मिलते हैं और क्या इसकी कुछ कमियां भी हैं।

PSU Ratna System क्या है और क्यों शुरू किया गया?

रत्न सिस्टम 1997 में शुरू हुआ था। इसका मकसद सरकारी कंपनियों को ज्यादा ऑटोनॉमी (स्वायत्तता) देना था ताकि वे तेजी से फैसले ले सकें और प्राइवेट कंपनियों से मुकाबला कर सकें।

1980 के दशक में PSUs को हर छोटे-बड़े फैसले के लिए मंत्रालय की मंजूरी लेनी पड़ती थी, जिससे बहुत देरी होती थी। 1991 के उदारीकरण के बाद सरकार ने एक बैलेंस्ड तरीका निकाला – कंपनियों को परफॉर्मेंस के आधार पर रत्न स्टेटस देकर ज्यादा आजादी देना।

Miniratna, Navratna और Maharatna: योग्यता और फायदे

Miniratna
Miniratna दो कैटेगरी में बंटा है।

  • Category-1: पिछले 3 साल लगातार प्रॉफिट में रहना चाहिए और कम से कम एक साल 30 करोड़ का प्रॉफिट होना चाहिए। इन कंपनियों को 500 करोड़ तक का निवेश बिना सरकार की मंजूरी के करने की छूट है।
  • Category-2: थोड़ी ढीली शर्तें, 250 करोड़ तक का निवेश अधिकार।
    भारत में करीब 50 Miniratna कंपनियां हैं।

Navratna
Navratna बनने के लिए कंपनी को पहले Miniratna Category-1 होना चाहिए, पिछले 5 साल में से 3 साल Excellent/Very Good रेटिंग मिली हो और 6 वित्तीय पैरामीटर्स पर कम से कम 60 स्कोर हो।
फायदे: 1,000 करोड़ तक का प्रोजेक्ट निवेश, JV और विदेशी सब्सिडरी बनाने की छूट, 100 करोड़ तक डेब्ट जुटाने की आजादी।
NALCO, IRCTC, Mazagon Dock जैसी कंपनियां हाल ही में Navratna बनी हैं।

Maharatna
यह सबसे ऊंचा स्टेटस है।
योग्यता: पिछले 3 साल औसत टर्नओवर 25,000 करोड़, नेट प्रॉफिट 5,000 करोड़ और नेटवर्थ 15,000 करोड़ से ज्यादा होना चाहिए।
फायदे: 5,000 करोड़ तक या नेटवर्थ का 15% तक निवेश बिना मंजूरी के, विदेश में एक्विजिशन करने की पूरी छूट।
Coal India, NTPC, Indian Oil, BPCL, SAIL जैसी बड़ी कंपनियां Maharatna हैं।

Ratna System कितना प्रभावी है?

इस सिस्टम के फायदे साफ दिखते हैं। Maharatna कंपनियां प्राइवेट कंपनियों से बेहतर ROE और ROCE दे रही हैं। NTPC जैसे PSUs ने इस ऑटोनॉमी का इस्तेमाल करके रिन्यूएबल एनर्जी में शिफ्ट किया है।

लेकिन कुछ कमियां भी हैं:

  • Poor performance पर स्टेटस डाउनग्रेड नहीं होता। BSNL अभी भी Category-1 PSU है जबकि लगातार घाटे में है।
  • MTNL जैसे कई Navratna PSUs भारी घाटे में चल रहे हैं।
  • बोर्ड में स्वतंत्र डायरेक्टर्स की 441 पदें खाली पड़ी हैं।
  • असल ऑटोनॉमी अभी भी सीमित है क्योंकि सरकार CEO नियुक्त करती है।

Key Insights

  • Maharatna कंपनियां सबसे ज्यादा स्वायत्तता और निवेश की छूट पाती हैं
  • Ratna स्टेटस ज्यादातर पहले से मजबूत PSUs को ही फायदा पहुंचाता है
  • struggling कंपनियों को यह सिस्टम ज्यादा नहीं बचा पाता
  • बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की भारी कमी है
  • 30 साल पुराना फ्रेमवर्क अब अपडेट की जरूरत महसूस कर रहा है

निष्कर्ष

PSU Ratna System ने सरकारी कंपनियों को निश्चित रूप से ज्यादा ऑटोनॉमी दी है, जिससे कुछ बड़े PSUs अच्छा प्रदर्शन कर पाए हैं। लेकिन यह सिस्टम पुराना पड़ चुका है। Poor performers को डाउनग्रेड न करने, बोर्ड में स्वतंत्रता की कमी और सर्विस सेक्टर PSUs पर सही दबाव न बन पाने जैसी कमियां अभी भी बाकी हैं। अगर इसे समय के साथ अपडेट किया गया तो यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए और ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

FAQs

  1. Maharatna, Navratna और Miniratna में क्या अंतर है?
    Maharatna सबसे ऊंचा स्टेटस है जिसमें सबसे ज्यादा निवेश की छूट मिलती है, फिर Navratna और Miniratna आते हैं।
  2. NTPC, Coal India और IOC किस कैटेगरी के PSUs हैं?
    ये सभी Maharatna कंपनियां हैं।
  3. Miniratna कंपनी को कितने का निवेश अधिकार है?
    Category-1 को 500 करोड़ और Category-2 को 250 करोड़ तक बिना मंजूरी के।
  4. Ratna सिस्टम की सबसे बड़ी कमी क्या है?
    Poor performance पर स्टेटस डाउनग्रेड न होना और असल ऑटोनॉमी की कमी।
  5. क्या struggling PSUs को Ratna स्टेटस बचाता है?
    ज्यादातर नहीं, जैसा MTNL के केस में देखा गया।

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