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भारत में Battery Energy Storage System (BESS): क्या यह देश की बिजली व्यवस्था को बदल देगा?

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बिजली का भविष्य बदलने वाली तकनीक

कल्पना कीजिए कि आपके शहर या गांव में कभी बिजली कटौती न हो, उद्योग 24 घंटे चलें और सोलर तथा विंड ऊर्जा बिना रुकावट इस्तेमाल हो सके। यह सपना अब वास्तविकता के करीब है, और इसके केंद्र में है Battery Energy Storage System India का तेजी से बढ़ता सेक्टर।

भारत में रिन्यूएबल ऊर्जा का विस्तार हो रहा है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती है अनियमित बिजली उत्पादन। इसी समस्या को हल करने के लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीक माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ वर्षों में यह सेक्टर कई गुना बढ़ सकता है और इसमें बड़े स्तर पर निवेश देखने को मिलेगा।


Battery Energy Storage System (BESS) क्या है?

Battery Energy Storage System (BESS) एक ऐसी तकनीक है जो अतिरिक्त बिजली को बैटरियों में स्टोर करती है और जरूरत पड़ने पर उसे वापस ग्रिड में सप्लाई करती है।

रिन्यूएबल ऊर्जा स्रोत जैसे सोलर और विंड हमेशा स्थिर नहीं होते।

  • सोलर बिजली केवल दिन में बनती है
  • विंड पावर हवा पर निर्भर करती है
  • मांग और सप्लाई का संतुलन बिगड़ सकता है

BESS इस अंतर को संतुलित करता है और बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाता है।


भारत में BESS की जरूरत क्यों बढ़ रही है?

भारत ने आने वाले वर्षों में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा रिन्यूएबल स्रोतों से लेने का लक्ष्य रखा है। लेकिन बिजली की “स्टोरेज” क्षमता सीमित होने के कारण कई तकनीकी समस्याएं आती हैं:

  • ग्रिड वोल्टेज में उतार-चढ़ाव
  • पीक डिमांड के समय बिजली की कमी
  • ट्रांसमिशन नेटवर्क पर दबाव

Battery Energy Storage System India इन समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है।


BESS कैसे काम करता है?

BESS सिस्टम तीन प्रमुख कार्य करता है:

  • अतिरिक्त बिजली को स्टोर करना
  • पीक डिमांड के समय बिजली देना
  • ग्रिड स्थिरता बनाए रखना

इससे बिजली कंपनियां सस्ते समय में बिजली स्टोर कर महंगे समय में सप्लाई कर सकती हैं, जिसे Energy Arbitrage कहा जाता है।


भारत में BESS सेक्टर की ग्रोथ और निवेश

भारत में कई बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं:

  • Tata Power
  • Adani Energy Solutions
  • JSW Energy
  • Reliance Industries
  • Ola Electric

India Energy Storage Alliance के अनुसार 2032 तक भारत के ऊर्जा स्टोरेज सेक्टर में लगभग ₹5 लाख करोड़ का निवेश हो सकता है।

बढ़ती इलेक्ट्रिक व्हीकल डिमांड और बैटरी टेक्नोलॉजी में सुधार भी इस सेक्टर को गति दे रहे हैं।


BESS की वैल्यू चेन कैसे काम करती है?

BESS इंडस्ट्री को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है:

1. Manufacturing

इस स्टेज में बैटरी सेल और मॉड्यूल बनाए जाते हैं।

2. Integration

बैटरियों को कंट्रोल सिस्टम और सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाता है।

3. Operations

यहां कंपनियां ग्रिड सेवाएं और बिजली प्रबंधन का काम करती हैं।

भारत में फिलहाल ऑपरेशन और इंटीग्रेशन कंपनियां ज्यादा सक्रिय हैं, जबकि बैटरी सेल निर्माण अभी शुरुआती चरण में है।


BESS कंपनियां कैसे कमाती हैं?

Battery Energy Storage System India में कंपनियों के मुख्य राजस्व मॉडल हैं:

  • Ancillary Services (ग्रिड स्थिरता सेवाएं)
  • Energy Arbitrage
  • Capacity Contracts
  • Hybrid Power Purchase Agreements (FDRE मॉडल)

FDRE (Firm and Dispatchable Renewable Energy) मॉडल में कंपनियां सोलर, विंड और बैटरी को मिलाकर स्थिर बिजली सप्लाई करती हैं।


BESS सेक्टर की प्रमुख चुनौतियां

हालांकि अवसर बड़े हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं:

  • बैटरी सेल के लिए आयात पर निर्भरता
  • लिथियम और अन्य धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव
  • शुरुआती लागत अधिक होना
  • लंबी अवधि के फिक्स्ड टैरिफ कॉन्ट्रैक्ट
  • ओवरकैपेसिटी का जोखिम

इन चुनौतियों के बावजूद, सरकार PLI स्कीम और अन्य नीतियों के जरिए इस सेक्टर को बढ़ावा दे रही है।


Key Insights

  • भारत में रिन्यूएबल ऊर्जा बढ़ने के साथ BESS की मांग तेजी से बढ़ेगी
  • बैटरी कीमतों में गिरावट से यह तकनीक और सस्ती होगी
  • Hybrid Power मॉडल भविष्य में ज्यादा लोकप्रिय हो सकता है
  • घरेलू बैटरी निर्माण भारत के लिए सबसे बड़ा अवसर है

निष्कर्ष

Battery Energy Storage System India देश की बिजली व्यवस्था को अधिक स्थिर और आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। रिन्यूएबल ऊर्जा के विस्तार के साथ BESS की जरूरत और बढ़ेगी। हालांकि लागत और आयात निर्भरता जैसी चुनौतियां अभी मौजूद हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी और निवेश के साथ यह सेक्टर आने वाले वर्षों में भारत के ऊर्जा भविष्य का आधार बन सकता है।


FAQs

1. BESS क्या है?
BESS एक तकनीक है जो बिजली को बैटरियों में स्टोर करके जरूरत पड़ने पर सप्लाई करती है।

2. भारत में BESS क्यों जरूरी है?
रिन्यूएबल ऊर्जा के अस्थिर उत्पादन को संतुलित करने के लिए।

3. BESS में कौन-सी बैटरी ज्यादा इस्तेमाल होती है?
लिथियम-आयन बैटरी सबसे ज्यादा उपयोग होती है।

4. क्या BESS से बिजली कटौती कम हो सकती है?
हाँ, यह ग्रिड स्थिरता बढ़ाकर बिजली कटौती कम कर सकता है।

5. क्या यह सेक्टर निवेश के लिए अच्छा है?
लंबी अवधि में यह तेजी से बढ़ने वाला सेक्टर माना जा रहा है।

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