El Niño 2026: Power Crisis and Rising Food Prices Threat in India
इस महीने अमेरिका के नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ने एलनीनो वॉच जारी कर दिया है। यह औपचारिक संकेत है कि जलवायु फेनोमेनन एलनीनो बनने की स्थितियां अनुकूल हो रही हैं। 2026 में जो ला नीना ने भारत को सामान्य से ज्यादा मानसून दिया था, वह अब कमजोर हो रही है। अगस्त तक एलनीनो बनने की संभावना 62% है।
एलनीनो भारत के मौसम, बिजली और कृषि पर गहरा असर डालता है। यह दक्षिण-पश्चिम मानसून को बाधित करता है, हीट वेव बढ़ाता है, फसल उत्पादन घटाता है और बिजली ग्रिड पर दबाव डालता है। आज हम इसी रिपोर्ट के आधार पर एलनीनो को विस्तार से समझेंगे।
एलनीनो क्या है और यह कैसे काम करता है?
एलनीनो स्पेनिश शब्द है जिसका मतलब “छोटा लड़का” होता है, लेकिन इसका जलवायु प्रभाव बहुत बड़ा है। सामान्य स्थिति में तेज हवाएं गर्म पानी को एशिया की ओर ले जाती हैं। इससे उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी प्रशांत क्षेत्र ठंडे रहते हैं।
जब एलनीनो आता है तो हवाएं कमजोर हो जाती हैं। गर्म पानी पूर्व की ओर लौट जाता है और प्रशांत महासागर का सतही तापमान अचानक बढ़ जाता है। कभी-कभी यह 1 डिग्री सेल्सियस और तेज इवेंट में 2-3 डिग्री तक बढ़ जाता है। 1950 से अब तक 26 एलनीनो इवेंट रिकॉर्ड हो चुके हैं।
इसके उलट ला नीना में एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में ज्यादा नमी और बारिश होती है। भारत में 2025 का सामान्य से ज्यादा मानसून इसी ला नीना के कारण था।
भारत के मौसम और मानसून पर एलनीनो का असर
एलनीनो दक्षिण-पश्चिम मानसून को बाधित करता है। भारत, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में सूखा पड़ता है। 2023-24 के एलनीनो ने भारत को सबसे गर्म साल दिया। दिल्ली के मुंगेशपुर में तापमान 52.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
हीट वेव के कारण लाखों घरों में एसी और कूलर फुल कैपेसिटी पर चलते हैं। इससे बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है।
पावर सेक्टर पर एलनीनो का दोहरा प्रभाव
एलनीनो भारत के पावर सेक्टर को दो तरीके से प्रभावित करता है।
डिमांड साइड: गर्मी बढ़ने से कूलिंग लोड बढ़ता है। 2015 में पीक पावर डिमांड 154 गीगावाट थी, जो 2024 में 246 गीगावाट हो गई। इस गर्मी में सरकार ने 270 गीगावाट का पीक डिमांड अनुमान लगाया है। मई में एसी का योगदान अकेले एक तिहाई था।
सप्लाई साइड: कमजोर मानसून से नदियां और जलाशय सूख जाते हैं। हाइड्रो पावर उत्पादन घटता है। 2024 के पहले छमाही में हाइड्रो जनरेशन 8% कम हुआ। इसकी भरपाई कोल और गैस से की गई। कोल जनरेशन 10% और गैस 50% बढ़ा।
सोलर पावर के कारण सूखे मौसम में भी कुछ राहत मिलती है क्योंकि बादल कम होते हैं। लेकिन कुल मिलाकर एलनीनो थर्मल पावर सेक्टर को फायदा देता है।
कृषि और खाद्य कीमतों पर असर
एलनीनो कृषि उत्पादन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। आईसीआरआईआर के आंकड़ों के अनुसार 1951 से 15 में से 11 मध्यम से गंभीर एलनीनो वर्षों में भारत का कृषि उत्पादन घटा। इन वर्षों में मानसून बारिश 9.7% कम हुई और खरीफ फूड ग्रेन उत्पादन 5.7% कम हुआ।
फूड भारत के सीपीआई बास्केट का लगभग आधा हिस्सा है। इसलिए कीमतें तेजी से बढ़ती हैं।
ग्लोबल प्रभाव और भारत पर अप्रत्यक्ष असर
एलनीनो का प्रभाव हजारों किलोमीटर दूर भी पड़ता है। इंडोनेशिया में सूखा पड़ने से पाम ऑयल उत्पादन घटता है, जिससे भारत में पाम ऑयल की कीमत बढ़ती है। शीले में ज्यादा बारिश से कॉपर उत्पादन प्रभावित होता है और भारत को महंगा कॉपर आयात करना पड़ता है।
अर्जेंटीना में ज्यादा बारिश से सोयाबीन उत्पादन बढ़ता है, जिससे सोयाबीन ऑयल की कीमतें कम रहती हैं – भारत के लिए यह अच्छी खबर है।
की इनसाइट्स
- एलनीनो बनने की 62% संभावना अगस्त तक
- भारत में मानसून कमजोर, हीट वेव बढ़ने का खतरा
- बिजली डिमांड बढ़ेगी, हाइड्रो कम होगा, कोल-गैस पर निर्भरता बढ़ेगी
- कृषि उत्पादन घटने से खाद्य कीमतें बढ़ सकती हैं
- सोलर पावर सूखे मौसम में कुछ राहत दे सकता है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- एलनीनो भारत में क्या करता है? यह मानसून को कमजोर करता है, हीट वेव बढ़ाता है और बिजली व खाद्य कीमतों पर असर डालता है।
- एलनीनो और ला नीना में क्या अंतर है? एलनीनो में पूर्वी प्रशांत गर्म होता है और भारत में सूखा पड़ता है, जबकि ला नीना में भारत को ज्यादा बारिश मिलती है।
- पावर सेक्टर पर एलनीनो का सबसे बड़ा असर क्या है? कूलिंग लोड बढ़ने से डिमांड बढ़ती है और हाइड्रो कम होने से कोल-गैस पर निर्भरता बढ़ती है।
- क्या सोलर पावर एलनीनो में मदद करता है? हां, सूखे मौसम में बादल कम होने से सोलर जनरेशन बढ़ सकता है।
- एलनीनो कितने समय तक रहता है? आमतौर पर 9-12 महीने, लेकिन प्रभाव 6-16 महीने तक खाद्य और ऊर्जा कीमतों पर दिखता है।