FSSAI Perpetual License: Major Reforms Explained | What Every Food Business Owner Must Know
भारत में फूड बिजनेस चलाना कोई आसान काम नहीं है। चाहे आप रेस्टोरेंट चेन चलाते हों, छोटी मिठाई की दुकान रखते हों या पैकेज्ड फूड बेचते हों, हर कुछ सालों में एफएसएसएआई लाइसेंस के लिए डॉक्यूमेंट जमा करना, फीस भरना, फॉर्म भरना और इंस्पेक्शन का इंतजार करना पड़ता था। रिन्यूअल मिस हो गया तो पूरा बिजनेस गैरकानूनी हो जाता था। लेकिन अब यह परेशानी काफी हद तक खत्म हो गई है।
10 मार्च को सरकार ने एफएसएसएआई लाइसेंसिंग नियमों में बड़े अमेंडमेंट नोटिफाई किए जो अगले दिन से ही लागू हो गए। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब FSSAI लाइसेंस परपेचुअल वैलिडिटी के साथ मिलेंगे। मतलब एक बार लाइसेंस ले लिया तो वह तब तक वैलिड रहेगा जब तक आप कोई नियम तोड़ते नहीं। रिन्यूअल का बार-बार झंझट और इंस्पेक्टरों का अनावश्यक दबाव अब काफी कम हो जाएगा।

एफएसएसएआई क्या है और यह क्यों बना?
2006 से पहले भारत में फूड सेफ्टी पर आठ अलग-अलग कानून थे और कई मंत्रालय इनके बीच कोऑर्डिनेशन भी नहीं था। मसाले एक नियम के तहत, मीट दूसरे के और पैकेज्ड फूड तीसरे के। कोई एक स्टैंडर्ड या एक अथॉरिटी नहीं थी।
इसी समस्या को दूर करने के लिए 2006 में फूड सेटी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट आया और एफएसएसएआई अस्तित्व में आई। यह बॉडी हर फूड बिजनेस को 14 डिजिट का यूनिक नंबर देती है जिसे हर जगह दिखाना पड़ता है। असल में यह 2011 में पूरी तरह काम करने लगी। तब करोड़ों बिजनेस – मैन्युफैक्चरर, रेस्टोरेंट, कैटरर, क्लाउड किचन – को एक छतरी के नीचे लाना था।
पुराना लाइसेंसिंग सिस्टम कैसे काम करता था?
पुराने नियम में बिजनेस के साइज के हिसाब से तीन स्तर थे।
- छोटे ऑपरेटर्स जैसे गोलगप्पे स्टॉल, जूस की गाड़ी या मिठाई की दुकान को बेसिक रजिस्ट्रेशन चाहिए था (टर्नओवर ₹12 लाख तक)।
- मीडियम बिजनेस को स्टेट लाइसेंस और बड़े मल्टिस्टेट, इंपोर्टर या डेयरी यूनिट्स को सेंट्रल लाइसेंस।
छोटे बिजनेस में इंस्पेक्शन ज्यादातर नहीं होता था, जबकि बड़े बिजनेस पर हर 6 महीने टेस्टिंग और नेशनल सर्वेलेंस की जिम्मेदारी थी।
FSSAI लाइसेंस के नए नियम क्या बदल रहे हैं?
तीन बड़े बदलाव आए हैं जो फूड बिजनेस को काफी आसान बनाएंगे।
1. परपेचुअल वैलिडिटी अब लाइसेंस तब तक वैलिड रहेगा जब तक कोई वायलेशन न हो। रिन्यूअल का सालाना प्रेशर खत्म। इससे इंस्पेक्टरों द्वारा घूस मांगने की संभावना भी कम हुई है। हालांकि हर साल 31 मई तक एनुअल रिटर्न और फीस जमा करना अभी भी जरूरी है, वरना लाइसेंस ऑटो सस्पेंड हो जाएगा।
2. टर्नओवर थ्रेशोल्ड बढ़ाया गया
- बेसिक रजिस्ट्रेशन अब ₹1.5 करोड़ टर्नओवर तक
- स्टेट लाइसेंस ₹50 करोड़ तक
- इससे ऊपर सेंट्रल लाइसेंस
जिन्हें पहले सेंट्रल लाइसेंस लेना पड़ता था अब वे स्टेट अथॉरिटी से आसानी से काम चला सकते हैं।
3. स्ट्रीट वेंडर्स को ऑटो रजिस्ट्रेशन जो वेंडर म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन या टाउन वेंडिंग कमिटी के साथ रजिस्टर्ड हैं, उन्हें खुद-ब-खुद एफएसएसएआई रजिस्टर्ड माना जाएगा। इससे 10 लाख से ज्यादा वेंडर्स को डबल रजिस्ट्रेशन से छुटकारा मिलेगा।
क्या सुरक्षा से कोई समझौता हो रहा है?
नए नियम कंप्लायंस को आसान बनाते हैं लेकिन असली सवाल है – क्या खाना सुरक्षित रहेगा?
कंप्लायंस का मतलब सिर्फ कागजी नियम फॉलो करना है, लेकिन खाने की असली क्वालिटी टेस्टिंग से ही पता चलती है। भारत में स्टेट लैब्स में हैवी मेटल, पेस्टिसाइड और माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्टिंग के लिए उपकरण कम हैं। पूरे देश में सिर्फ 232 लैब्स हैं और रेफरल लैब्स सिर्फ 22। सैंपल्स हफ्तों पड़े रहते हैं।
इंस्पेक्टर भी बेहद कम हैं – 1 करोड़ बिजनेस के लिए सिर्फ 2531 फूड सेफ्टी ऑफिसर। 2018-2022 के बीच सिर्फ 1225 लाइसेंस रद्द हुए, यानी 99.96% बिजनेस पर कोई असर नहीं पड़ा।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- रिन्यूअल खत्म होने से पेपरवर्क और भ्रष्टाचार दोनों कम होंगे
- छोटे और स्ट्रीट वेंडर बिजनेस को सबसे ज्यादा फायदा
- बड़े बिजनेस पर अब रिस्क-बेस्ड थर्ड पार्टी ऑडिट बढ़ेगा
- लेकिन लैब क्षमता और इंस्पेक्टर भर्ती अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है
निष्कर्ष
FSSAI लाइसेंस के ये नए नियम फूड बिजनेस को काफी राहत दे रहे हैं। रिन्यूअल का बोझ हट गया है, छोटे उद्यमियों को आसानी हुई है और स्ट्रीट वेंडर्स को भी फायदा पहुंचेगा। लेकिन असली सफलता तभी होगी जब टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, इंस्पेक्टरों की कमी पूरी होगी और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। समय बताएगा कि स्पीड और सेफ्टी दोनों साथ-साथ चल पाएंगे या नहीं।
पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. FSSAI लाइसेंस अब रिन्यू करने की जरूरत नहीं? नहीं, अब परपेचुअल वैलिडिटी है। सिर्फ सालाना रिटर्न और फीस समय पर जमा करनी होगी।
2. छोटे बिजनेस को कितना फायदा होगा? टर्नओवर ₹1.5 करोड़ तक अब बेसिक रजिस्ट्रेशन में आ जाएगा और प्री-इंस्पेक्शन की जरूरत भी खत्म हो गई है।
3. स्ट्रीट वेंडर्स को ऑटो रजिस्ट्रेशन कब मिलेगा? जब वे म्यूनिसिपल या टाउन वेंडिंग कमिटी के साथ रजिस्टर्ड होंगे।
4. क्या बड़े ब्रांड्स पर अब कम नजर रखी जाएगी? नहीं, वे अब भी थर्ड पार्टी ऑडिट और रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन के दायरे में रहेंगे।
5. पुराने लाइसेंस वाले क्या करें? नए नियम लागू होने के साथ उनका लाइसेंस भी परपेचुअल वैलिड हो जाएगा।