Ghost Malls in India: The Crisis of Empty Malls and Revival Opportunities | Ghost Malls in India
आपके शहर में भी कोई पुराना मॉल होगा जिसे देखकर लगता है कि समय रुक गया है। बाहर का पेंट फीका, टूटे साइन बोर्ड, अंदर सुनसान कॉरिडोर, सिर्फ एक-दो दुकानें खुली और वे भी आधे खाली। एयर कंडीशनिंग चल रही है लेकिन मॉल वाली चहल-पहल गायब। ऐसे मॉल अब भारत के कई शहरों में आम हो गए हैं और रियल एस्टेट भाषा में इन्हें घोस्ट मॉल्स कहते हैं।
नाइट फ्रैंक की हालिया रिपोर्ट ने इस समस्या को पहली बार पूरी गहराई से मापा है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में 15.5 मिलियन स्क्वायर फीट का घोस्ट मॉल स्पेस है। यह सिर्फ खाली जगह नहीं, बल्कि अंडरयूज्ड लैंड और कैपिटल का बड़ा पूल है। आज हम समझेंगे कि घोस्ट मॉल्स क्यों बन रहे हैं, कहां ज्यादा हैं और इन्हें दोबारा जीवंत बनाने का रास्ता क्या है।
भारत में शॉपिंग हैबिट्स: मॉल vs हाई स्ट्रीट
नाइट फ्रैंक ने 32 शहरों का सर्वे किया और पाया कि लोग सिर्फ मॉल्स से शॉपिंग नहीं करते। 365 मॉल्स में 22,400 स्टोर्स हैं, लेकिन 58 हाई स्ट्रीट्स (जैसे दिल्ली का कनॉट प्लेस, बेंगलुरु का एमजी रोड) में भी 7,900 स्टोर्स हैं। एयरपोर्ट्स और फाइव-स्टार होटल्स में भी शॉपिंग होती है।
बड़े मेट्रो शहरों में मॉल्स का फुटप्रिंट बहुत बड़ा है (105 मिलियन स्क्वायर फीट में से 98 मिलियन मॉल्स में), लेकिन लोग अभी भी हाई स्ट्रीट्स को डेली शॉपिंग के लिए पसंद करते हैं। कुछ शहरों में मॉल्स बहुत सफल हैं (मंगलौर, लखनऊ), वहीं सूरत और लुधियाना जैसे शहरों में हाई स्ट्रीट ट्रेडिशन इतनी मजबूत है कि मॉल्स कम चलते हैं।
घोस्ट मॉल्स क्या हैं और क्यों बनते हैं?
नाइट फ्रैंक के अनुसार कोई भी शॉपिंग सेंटर जो कम से कम 3 साल पुराना हो और जिसका 40% या उससे ज्यादा स्पेस खाली हो, उसे घोस्ट मॉल माना जाता है। भारत में ऐसे मॉल्स की संख्या लगातार बढ़ रही है – 2022 में 57, 2023 में 64 और 2024 में 60।
मुख्य कारण:
- गलत लोकेशन – शहर से दूर
- खराब डिजाइन – वॉकवे फ्लो नहीं करता
- एंकर टेनेंट्स का जाना – एक बड़ा ब्रांड चला गया तो छोटी दुकानें भी बंद
- ओवर कैपेसिटी – जरूरत से ज्यादा मॉल्स बन गए
- पुराना मैनेजमेंट – छोटे ओनर्स के पास कोई यूनिफाइड प्लान नहीं
एक बार लोग किसी मॉल को “द प्लेस टू गो” मानना बंद कर देते हैं तो उसकी स्थिति और बिगड़ती जाती है।
घोस्ट मॉल्स का स्टॉक और रिवाइवल की संभावना
रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल 15.5 मिलियन स्क्वायर फीट घोस्ट मॉल स्पेस है। इसमें से 4.8 मिलियन स्क्वायर फीट को रिवाइव किया जा सकता है। ये मॉल्स अच्छे लोकेशन में हैं, बस मैनेजमेंट और रिनोवेशन की जरूरत है।
रिवाइवल से अनुमानित सालाना रेंटल इनकम ₹357 करोड़ हो सकती है। साउथ और वेस्ट भारत में सबसे ज्यादा पोटेंशियल है। दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों में 66% वैल्यू है। कई मॉल्स को ऑफिस, को-वर्किंग स्पेस या एजुकेशन हब में बदल दिया गया है और वे फिर से चलने लगे हैं।
निष्कर्ष
घोस्ट मॉल्स भारत की रियल एस्टेट का एक छिपा हुआ संकट हैं, लेकिन साथ ही एक बड़ा अवसर भी। 15.5 मिलियन स्क्वायर फीट खाली स्पेस सिर्फ नुकसान नहीं, बल्कि स्मार्ट रिनोवेशन और सही प्लानिंग से लाखों करोड़ का रेंटल इनकम जेनरेट कर सकता है। मॉल्स को सिर्फ शॉपिंग सेंटर नहीं, बल्कि शहर का लिविंग स्पेस बनाना होगा।
अगर डेवलपर्स और सरकार मिलकर पुराने मॉल्स को रिवाइव करें तो यह न सिर्फ रियल एस्टेट को बूस्ट देगा बल्कि शहरों को भी नई जान देगा। घोस्ट मॉल्स का भविष्य अब हमारे हाथ में है।
की इनसाइट्स
- भारत में 15.5 मिलियन स्क्वायर फीट घोस्ट मॉल स्पेस
- 4.8 मिलियन स्क्वायर फीट को रिवाइव किया जा सकता है
- रिवाइवल से ₹357 करोड़ सालाना रेंटल इनकम संभव
- दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु में सबसे ज्यादा पोटेंशियल
- हाई स्ट्रीट्स अभी भी कई शहरों में मजबूत हैं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- घोस्ट मॉल क्या है? कोई मॉल जो 3 साल पुराना हो और जिसका 40% या ज्यादा स्पेस खाली हो।
- घोस्ट मॉल्स क्यों बन रहे हैं? गलत लोकेशन, खराब डिजाइन, एंकर टेनेंट्स का जाना और ओवर कैपेसिटी।
- इन्हें रिवाइव करना संभव है?हाँ – 4.8 मिलियन स्क्वायर फीट को रिनोवेट करके फिर से चलाया जा सकता है।
- कौन से शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं? दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु और सैटेलाइट शहर।
- रिवाइवल से कितना फायदा? अनुमानित ₹357 करोड़ सालाना रेंटल इनकम।