2025 प्रेशियस मेटल्स के लिए यादगार साल रहा। गोल्ड का प्राइस 70% और सिल्वर का 150% ईयर ऑन ईयर बढ़ा। लेकिन प्लैटिनम ने दोनों को पछाड़ दिया – 170% का जबरदस्त उछाल! दिसंबर 2024 में प्लैटिनम $900 प्रति औंस पर था, जो दिसंबर 2025 में $2400 पर पहुंच गया। इसका सीधा कारण हाई डिमांड और लो सप्लाई है। प्लैटिनम दुनिया का सबसे रेयर प्रेशियस मेटल है – गोल्ड से 20 गुना और सिल्वर से 100 गुना कम उपलब्ध। फिर भी इसका इंडस्ट्रियल यूज बहुत ज्यादा है, खासकर ऑटोमोटिव, केमिकल और ग्लास सेक्टर्स में। आज हम समझेंगे कि कौन से फैक्टर्स प्लैटिनम प्राइस 2025 में इतना बढ़ा रहे हैं, प्रमुख देशों की क्या भूमिका है और इंडिया का इसमें क्या योगदान है।
प्लैटिनम की डिमांड के चार मुख्य सोर्स
प्लैटिनम की डिमांड मुख्य रूप से चार सेक्टर्स से आती है: ऑटोमोटिव, ज्वेलरी, इंडस्ट्रियल एप्लीकेशंस और इन्वेस्टमेंट।
ऑटोमोटिव सेक्टर – सबसे बड़ा डिमांड ड्राइवर प्लैटिनम हीट, कोरोजन और टॉक्सिक गैसेज के खिलाफ रेजिस्टेंट है। इसका मेल्टिंग पॉइंट 1768°C है (गोल्ड का सिर्फ 1063°C)। इसलिए यह बेहतरीन ऑटो कैटलिस्ट है। पेट्रोल-डीजल व्हीकल्स से निकलने वाली हानिकारक गैसेज (CO, हाइड्रोकार्बंस, NOx) प्लैटिनम कैटलिस्ट से कम हानिकारक में बदल जाती हैं। एक सामान्य ICE व्हीकल में 2 से 7 ग्राम प्लैटिनम लगता है। लेकिन EV ट्रांजिशन से 2025 में ऑटोमोटिव डिमांड 3200 koz से घटकर 3000 koz रह गई। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह शॉर्ट-टर्म है। फ्यूल सेल EV में प्लैटिनम हाइड्रोजन को इलेक्ट्रिसिटी में कन्वर्ट करता है। 2025 में यह डिमांड 1000 koz से कम थी, लेकिन 2040 तक 6 गुना (6000 koz) बढ़ सकती है।
ज्वेलरी – बढ़ता आकर्षण प्लैटिनम का 24-28% डिमांड ज्वेलरी से आता है। हाई ड्यूरेबिलिटी और रेयरिटी की वजह से वेडिंग रिंग्स में पॉपुलर है। 2025 में ज्वेलरी डिमांड 7% बढ़कर लगभग 2100 koz हो गई – 2018 के बाद सबसे ऊंचा स्तर। गोल्ड $4500/oz पर था, जबकि प्लैटिनम सिर्फ $2400/oz – लगभग आधा। इससे प्लैटिनम अफोर्डेबल लग्जरी बन गया। नॉर्थ अमेरिका, यूरोप और चाइना में ग्रोथ मजबूत रही। इंडिया में 2025 में फैब्रिकेशन 30% गिरकर 186 koz रह गया (US टैरिफ से एक्सपोर्ट्स कम हुए), लेकिन यह चौथा सबसे ऊंचा स्तर है। डोमेस्टिक डिमांड हाई है और वेडिंग सीजन में बढ़ोतरी की उम्मीद है। टियर-2/3 शहरों में भी एक्सपेंशन हो रहा है।
इंडस्ट्रियल एप्लीकेशंस – हाई टेम्परेचर पर मजबूत 24-29% डिमांड इंडस्ट्रियल से है। प्लैटिनम हाई टेम्परेचर पर स्टेबल रहता है। केमिकल (30-35%), ग्लास, मेडिकल, पेट्रोलियम, इलेक्ट्रिकल सेक्टर्स में यूज होता है। चाइना केमिकल डिमांड का 38-40% कंट्रोल करता है। 2019-2023 में चाइना पेट्रोकेमिकल कैपेक्स साइकिल में था, लेकिन 2024-2025 में स्लो हो गया। ग्लास में 70% डिमांड चाइना से – LCD प्रोडक्शन से लिंक्ड। 2025 में इंडस्ट्रियल डिमांड गिरा, लेकिन 2026 में केमिकल 10% और ग्लास 66% बढ़ सकता है। हाइड्रोजन सेगमेंट में तेज ग्रोथ – 2026 में ग्लास के बाद सबसे ज्यादा।
इन्वेस्टमेंट – बढ़ता इंटरेस्ट 9% डिमांड इन्वेस्टमेंट से – बार्स, कॉइंस, ETFs। पिछले 2 सालों में डिमांड लगभग डबल (397 koz से 742 koz)। चाइना में 2024 में 64% डिमांड – 2019 में सिर्फ 11% था। इंडिया में प्लैटिनम इन्वेस्टमेंट लिमिटेड है। गोल्ड-सिल्वर ज्यादा पॉपुलर। कोई डोमेस्टिक ETF नहीं, बार्स/कॉइंस का मार्केट छोटा। ज्यादातर ज्वेलरी के थ्रू इनडायरेक्ट इन्वेस्टमेंट।
सप्लाई साइड: क्यों इतनी कम?
प्लैटिनम का 80% सप्लाई माइनिंग से, 20% रिसाइक्लिंग से। माइनिंग कंसंट्रेटेड – साउथ अफ्रीका 70% (बुशवेल्ड कॉम्प्लेक्स), रशिया 12% (नॉरिल्स्क निकल)। इंडिया में कोई माइनिंग नहीं – पूरी तरह इंपोर्ट्स पर निर्भर। 2023 में $266 मिलियन, 2024 में $2.68 बिलियन इंपोर्ट्स। 2025 में सप्लाई गिरा – हाई रेनफॉल/फ्लडिंग, डिक्लाइनिंग ओर ग्रेड, जियोपॉलिटिकल इश्यूज। डेफिसिट 2024 में 900 koz, 2025 में 700 koz। रिसाइक्लिंग बढ़ रही है – 2026 तक 24% सप्लाई। रिसाइकल प्लैटिनम 99% प्योरिटी रिटेन करता है।
फ्यूचर आउटलुक
WPIC के अनुसार 2026 में माइन सप्लाई 2%, रिसाइक्लिंग 10% बढ़ सकती है। टोटल सप्लाई 4% बढ़कर बैलेंस्ड मार्केट। डिमांड 6% गिर सकती है – ऑटो, ज्वेलरी और इन्वेस्टमेंट में गिरावट, सिर्फ इंडस्ट्रियल बढ़ेगा। सरप्लस छोटा रहेगा। प्लैटिनम प्राइस हाई रह सकता है।
की इनसाइट्स
- प्लैटिनम प्राइस 2025 में 170% बढ़ा – हाई डिमांड और लो सप्लाई से डेफिसिट।
- ऑटोमोटिव डिमांड शॉर्ट-टर्म गिरा, लेकिन फ्यूल सेल में भविष्य में 6 गुना ग्रोथ।
- ज्वेलरी डिमांड मजबूत – गोल्ड महंगा होने से प्लैटिनम अफोर्डेबल लग्जरी बना।
- इंडस्ट्रियल डिमांड 2026 में रिकवर करेगा – केमिकल 10%, ग्लास 66% ग्रोथ।
- साउथ अफ्रीका 70% सप्लाई कंट्रोल करता है – डिसरप्शन से ग्लोबल प्रभाव।
- इंडिया पूरी तरह इंपोर्ट-डिपेंडेंट – डोमेस्टिक ज्वेलरी डिमांड हाई।
निष्कर्ष
प्लैटिनम प्राइस 2025 में हाई डिमांड (ऑटो, ज्वेलरी, इंडस्ट्रियल, इन्वेस्टमेंट) और लो सप्लाई (साउथ अफ्रीका-डिपेंडेंट, जियोपॉलिटिकल रिस्क) से 170% बढ़ा। इंडिया में डोमेस्टिक ज्वेलरी डिमांड मजबूत है, लेकिन माइनिंग नहीं – इंपोर्ट्स पर निर्भर। फ्यूचर में फ्यूल सेल EV और हाइड्रोजन से ग्रोथ की उम्मीद। प्लैटिनम गोल्ड से अंडरवैल्यूड लगता है – लॉन्ग-टर्म में मजबूत पोटेंशियल।
FAQs
- प्लैटिनम प्राइस 2025 में क्यों इतना बढ़ा? हाई डिमांड और लो सप्लाई – डेफिसिट 700 koz।
- ऑटोमोटिव में प्लैटिनम यूज क्यों घट रहा है? EV ट्रांजिशन से – लेकिन फ्यूल सेल में भविष्य में तेज ग्रोथ।
- इंडिया में प्लैटिनम ज्वेलरी डिमांड कैसा है? 2025 में गिरावट आई, लेकिन डोमेस्टिक डिमांड हाई – वेडिंग सीजन में बढ़ोतरी।
- प्लैटिनम सप्लाई का मुख्य सोर्स कौन है? साउथ अफ्रीका (70%), रशिया (12%)।
- 2026 में प्लैटिनम मार्केट कैसा रहेगा? बैलेंस्ड, छोटा सरप्लस – प्राइस हाई रह सकता है।